मजदूर से कारीगर बनती महिलाएं

मजदूर से कारीगर बनती महिलाएं
March 08 23:46 2019 Print This Article

Women – राजमिस्त्री का पेशा अपनाकर ग्रामीण महिलाओं ने पेश की महिला सशक्तिकरण की मिसाल 

भोपाल। निर्माण कार्यों में पारंपरिक रूप से महिलाएं सहयोगी की भूमिका में रहती हैं। लेकिन अब इस पेशे में महिलाएं भी अगुवाई कर रही हैं। मध्यप्रदेश के सीहोर, रायसेन और पन्ना जिले की 450 महिलाएं प्रशिक्षण लेकर राजमिस्त्री का काम करने लगी हैं। महिलाओं ने शुरुआत तो शौचालय बनाने से की, पर अब वे ग्रामीण आवास एवं शेड बनाने में भी मुख्य राजमिस्त्री के रूप में काम कर रही हैं।

Samarthan SIDBI-

60 महिलाएं हार्डवेयर एवं निर्माण सामग्रियों की दुकान चला रही हैं। 139 महिलाएं सफाई कार्यकर्ता के रूप में 237 शालाओं में कार्य कर रही हैं। इन महिलाओं ने अपनी नियमित कमाई से ज्यादा और अतिरिक्त आय हासिल कर रही हैं। यह स्वैच्छिक संस्था समर्थन – सेंटर फॉर डेवलपमेंट द्वारा सिडबी, दिल्ली के सहयोग से स्वच्छता आधारित व्यवसायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए चलाई गई परियोजना की बदौलत संभव हुआ है।

इस नवाचारी पहल के बारे में महिलाओं के अनुभवों को सुनने एवं इसे व्यापक रूप देने की संभावनाओं को तलाशने के लिए समर्थन संस्था द्वारा सिडबी के सहयोग से भोपाल में ‘‘स्वच्छता सुविधाओं की वृद्धि एवं स्वच्छता आधारित व्यवसायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु क्षमता विकास’’ विषय को लेकर एक अनुभव साझा कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर संचार विषेषज्ञ प्रो. दविन्दर कौर उप्पल ने कुछ चुनिंदा महिलाओं को सम्मानित किया।

Samarthan SIDBI-

इन महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। रायसेन जिले के रतनपुर गांव की सुश्री सुशीला बाई ने बताया कि उन्होंने 6 आवास और 45 शौचालय बनाए। अब वे कठिन काम भी कर लेती हैं। सुश्री सविता ग्वाला पीपलखिरिया गांव की सरपंच हैं। उन्होंने निर्माण सामग्रियों की दुकान खोली हैं। वे कहती हैं कि संस्था की पहल से हम महिलाएं अपने पैरों पर खड़ा हो पाई हैं। सीहोर जिले के बड़घाटी गांव की सुश्री सुनीता जाटव ने बताया कि राजमिस्त्री के रूप में पहले लोगों ने महत्व नहीं दिया, लेकिन अब वे बुलाकर काम देते हैं।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुश्री गौरी सिंह ने कहा कि यह एक आंख खोलने वाला प्रयास है। आने वाले 5 सालों में मध्यप्रदेश में 46 लाख आवास निर्माण किए जाने है। स्व्च्छ भारत मिशन में लगभग 400 करोड़ रूपये अनाबद्द राशि है। इससे जुड़े कामों में सरकार महिलाओं को प्राथमिकता देगी।

समर्थन के निदेशक डॉ. योगेश कुमार ने कार्यक्रम को संचालित करने हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं ने पारंपरिक सोच को बदलते हुए राजमिस्त्री के पेशे को स्वीकार किया। आज वे न केवल स्वावलंबी हैं, बल्कि समाज की सोच को बदलकर महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश की है। वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक देवीदास निमजे ने पिछले डेढ़ साल के अनुभवों को साझा किया। सिडबी के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. योगेश माहोर ने कहा कि महिलाओं की अगुवाई में सैनिटेशन का काम करना एक नवाचारी पहल है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अतिरिक्त आयुक्त अजित तिवारी ने कहा कि सैनिटेशन कार्यों को वित्तीय संस्था से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

वाटर एड के क्षेत्रीय प्रबंधक बीनू अरिकल ने कहा कि ज्यादा काम मिलने के बाद कौशल में तेजी से विकास होगा। इसमें वाटर एड भी सहयोग करेगा। वृत्ति संस्था के परिमल गुप्ता ने कहा कि ये महिलाएं प्रशिक्षक के रूप में दूसरी महिलाओं को प्रशिक्षण दे, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव आएगा। मध्यप्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी आयुक्त चितरंजन त्यागी एवं एमपीएसपीसी के मुख्य सलाहकार रमेश कुमार श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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