महात्मा गाँधी के विचारों को व्यवहारिक जीवन में आत्मसात करना जरूरी

महात्मा गाँधी के विचारों को व्यवहारिक जीवन में आत्मसात करना जरूरी
January 24 20:48 2019 Print This Article

EPCO – गाँधीजी की 150वीं जयंती के व्याख्यानों की श्रृंखला में डॉ. एस.एन. सुब्बाराव
भोपाल। सुप्रसिद्ध गाँधीवादी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ने आज के दौर में अखण्ड भारत की अवधारणा को चिरस्थायी बनाने के लिये महात्मा गाँधी के विचारों को व्यवहारिक जीवन में आत्मसात करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्रीय एकता की मजबूती के लिये दृढ़ संकल्प ले, तो भारत दुनिया का सिरमौर बन सकता है। डॉ. सुब्बाराव ने भोपाल स्थित पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती पर आयोजित व्याख्यानों की श्रृंखला में ‘आज के समय में गाँधी” विषय पर विचार व्यक्त किये।

 

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डॉ. सुब्बाराव ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में सोवियत संघ जैसा मजबूत देश कई हिस्सों में बँट गया। विविधता से परिपूर्ण भारत को, जिसमें अनेक भाषा बोलने और धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं, एक सूत्र में बाँधकर रखना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्रीय एकता का संकल्प लेकर निरंतर कार्य करे, तो देश की एकता को कोई भी शक्ति नुकसान नहीं पहुँचा सकती।

उन्होंने कहा कि ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति के ह्रदय में है। प्रत्येक व्यक्ति में सभी धर्मों के प्रति समभाव का होना भी जरूरी है। डॉ. राव ने महात्मा गाँधी की सर्वधर्म प्रार्थना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी ने सर्वधर्म प्रार्थना के माध्यम से विभिन्न विचारों के लोगों को सदैव एक सूत्र में बाँधे रखा।

डॉ. सुब्बाराव ने युवाओं से पर्यावरण के प्रति निरंतर सजग रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण ईश्वर से जुड़ने में मदद करता है। देश में विभिन्न धर्मों के अनेक तीर्थ-स्थल पहाड़ों और नदियों के करीब हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ों की रक्षा और नदियों की सफाई का संकल्प लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिये सक्रिय रहने की जरूरत है।

कार्यक्रम में पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव श्री अनुपम राजन ने बताया कि महात्मा गाँधी की जयंती 2 अक्टूबर, 2018 से अब तक 3 वक्ताओं ने महात्मा गाँधी के विचारों पर व्याख्यान दिये हैं। इनमें सर्वश्री ध्रुव शुक्ल, उदयन वाजपेयी और चिन्मय मिश्र शामिल हैं। कार्यक्रम में कार्यपालन संचालक जितेन्द्र सिंह राजे ने भी विचार रखे। लोकेन्द्र ठक्कर ने आभार व्यक्त किया।

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