निजी क्षेत्रों में दबी श्रमिकों की आवाज

निजी क्षेत्रों में दबी श्रमिकों की आवाज
February 19 20:34 2019 Print This Article

Labour – By हरीश बाबू
ना तो श्रमिक नियमों का हो रहा पालन और ना ही मिल रहा समय पर वेतन

भोपाल। देश के सरकारी विभागों में कर्मचारियों की आवाज उठाने के लिए ढेरों संगठन हैं। रेलवे, बीएसएनएल, भेल, कोल माइंस सहित तमाम विभागों में वाम समर्थित लेबर यूनियनों का दबदबा है, वही कुछ विभागों में कांग्रेस, भाजपा व क्षेत्रीय दलों से समर्थित यूनियनें प्रशासन पर दबाव बनाती रहीं हैं। जबकि निजी औद्योगिक क्षेत्र इससे बिल्कुल अछुते हैं। लेबर यूनियनें ना के बराबर हैं और ना ही उनका दखल है।

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ऐसे में निजी क्षेत्रों में श्रमिकों के बेहद बुरे हाल हैं। श्रमिकों के बराबर वेतन, स्वास्थ्य बीमा व अन्य सुविधाओं से मेहरूम रखा जा रहा है। न्यूनतम मजदूरी देकर, कहीं पांच से आठ हजार रुपये के वेतन पर बंधुआ मजदूरों को रखा जा रहा है। हाल के कुछ महीनों पहले भोपाल व विदेश में कार्यरत कंपनी जीआई इडस्ट्री ने सैकड़ों लोगों को नौकरी से निकाला। यही नहीं निकाले कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दिया।

इसी तरह की एक मल्टीनेशनल दवा कंपनी के एक कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर कंपनी के संबंध में खुलासा किया था। जिसमें बताया गया था कि कंपनी के अंदर प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों को बेहद गंभीर बीमारी हो गई है। उनके स्वास्थ्य को लेकर प्रबंधन बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। ये चंद उदाहरण है। ऐसा देशभर में देखने को मिल रहा है। एक अनुमान के मुताबिक संगठित क्षेत्रों की तुलना में असंगठित क्षेत्रों में अधिक श्रमिक कार्य करते हैं।

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लेबर इंस्पेक्टरों की मिलीभगत
सूत्रों के मुताबिक निजी कंपनियां इंस्पेक्टरों के साथ सांठ- गांठ कर लेती हैं। इस कारण से श्रमिकों के लिये बनाये गये कानूनों का पालन नहीं हो पाता।

केंद्र की सरकार भी गंभीर नहीं
केंद्र की सरकार भी श्रमिकों को न्याय दिलाने के प्रति गंभीर नहीं है। न्यूनतम वेतन दिलाने के खास प्रयास नहीं किये गये।

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देश में ट्रेड यूनियन एक्ट ऑफ़ 1926 के अधीन करीब 20,000 मजदूर संगठन पंजीकृत हैं।
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के 3.3 करोड़ सदस्य हैं और यह कांग्रेस से संबद्ध है।
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के 1.7 करोड़ सदस्य हैं। और यह भाजपा से संबद्ध है।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) के 1.4 करोड़ सदस्य हैं और यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य है।
हिन्द मजदूर संघ एक स्वतंत्र संगठन है जिसके 90 लाख सदस्य हैं।
सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियंस सीटू के 57 लाख सदस्य हैं और यह मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से सम्बंधित है।
देश की श्रम शक्ति में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की हिस्सेदारी 90 फीसदी है और उनको पूरी सामाजिक सुरक्षा तक हासिल नहीं है।

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